Thursday, 28 January 2016

पौधा

था तो सरसब्ज़
वो पौधा तो हरा था
और तन्दरूस्त थीं शाखें भी

मगर उसका कोई कद न निकल पाया था
बहुत साल सींचा भी गया

मेरे माली को शिकायत थी
कभी फूल न आये उस पर

और कई साल के बाद
मेरे माली ने खोद निकाला है जमीं से
सारे बागीचे में फैली हुई निकली हैं जड़ें

बरसों पाले हुए रिश्ते की तरह
जिसकी शाखें तो हरी रहती हैं लेकिन
उस पर फूल फल आते नहीं