कुछ ख़्वाबों के ख़त इन में
कुछ चाँद के आईने
सूरज की शुआएँ हैं
नज़मों के लिफाफ़ों में
कुछ मेरे तजुर्बे हैं
कुछ मेरी दुआएँ हैं
निकलोगे सफ़र पर जब
यह साथ में रख लेना
शायद कहीं काम आए
कुछ ख़्वाबों के ख़त इन में
कुछ चाँद के आईने
सूरज की शुआएँ हैं
नज़मों के लिफाफ़ों में
कुछ मेरे तजुर्बे हैं
कुछ मेरी दुआएँ हैं
निकलोगे सफ़र पर जब
यह साथ में रख लेना
शायद कहीं काम आए
सब पे आती है
सब की बारी से
मौत मुंसिफ़ है
कम-ओ-बेश नहीं
ज़िंदगी सब पे क्यों नहीं आती?
उड़ के जाते हुए पंछी ने
बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलती रही
वह शाख़ फ़िज़ा में
अलविदा कहने को?
या
पास बुलाने के लिए?
बहुत बौना है ये सूरज
हमारी कहकशाँ की इस नवाही सी galaxy में बहुत बौना सा ये सूरज जो रौशन है
ये मेरी कुल हदों तक रौशनी पहुँचा नहीं पाता
मैं marc और Jupiter से जब गुजरता हूँ
भँवर से ब्लैक होलों के
मुझे मिलते हैं रस्ते में
सियह गिर्दाब चकराते ही रहते हैं
मसल के जुस्तजु के नंगे सहराओं में
वापस फेंक देते हैं
जमीं से इस तरह बाँधा गया हूँ मैं
गले से gravity का दायमी पट्टा नहीं खुलता
बस
चन्द करोड़ों सालों में
सूरज की आग बुझेगी जब
और राख उड़ेगी सूरज से
जब कोई चाँद न डूबेगा
और कोई जमीं न उभरेगी
तब ठंढा बुझा इक कोयला सा
टुकड़ा ये जमीं का घूमेगा
भटका भटका
मद्धम की सी रोशनी में
मैं सोचता हूँ
उस वक्त अगर
कागज़ पे लिखी इक नज़्म कहीं उड़ते उड़ते
सूरज में गिरे
तो सूरज फिर से जलने लगे
शीशम
अब तक सहमा सा चुपचाप खड़ा है
भीगा भीगा
ठिठुरा ठिठुरा.
बूँदें पत्ता पत्ता कर के
टप टप करती टूटती हैं तो
सिसकी की आवाजआती है
बारिश के जाने के बाद भी
देर तलक टपका रहता है
तुमको छोड़े देर हुई है
आँसू अब तक टूट रहे हैं