दिन खाली खाली बर्तन है
और रात है जैसे अंधा कुंवा
इन सूनी अंधेरी आँखों में
आंसू की जगह आता है धुंआ
जीने की वजह तो कोई नहीं
मरने का बहाना ढूंढता है
और रात है जैसे अंधा कुंवा
इन सूनी अंधेरी आँखों में
आंसू की जगह आता है धुंआ
जीने की वजह तो कोई नहीं
मरने का बहाना ढूंढता है
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