Friday, 29 November 2013

चुपचाप

कैसे चुपचाप मर जाते हैं
कुछ लोग यहाँ
जिस्म की ठंडी सी
तारीक सियाह कब्र के अंदर
न किसी सांस की आवाज़
न सिसकी कोई
न कोई आह
न जुम्बिश
न ही आहट कोई
ऐसे चुपचाप ही मर जाते हैं
कुछ लोग यहाँ
उनको दफ़नाने की ज़हमत भी उठानी नहीं पड़ती

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