कैसे चुपचाप मर जाते हैं कुछ लोग यहाँ जिस्म की ठंडी सी तारीक सियाह कब्र के अंदर न किसी सांस की आवाज़ न सिसकी कोई न कोई आह न जुम्बिश न ही आहट कोई ऐसे चुपचाप ही मर जाते हैं कुछ लोग यहाँ उनको दफ़नाने की ज़हमत भी उठानी नहीं पड़ती
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