मैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ कुचलता हुआ घास की कलगियाँ गिराता हुआ गर्दनें इन दरख़्तों की छुपता हुआ जिनके पीछे से निकला चला जा रहा था वह सूरज त'आक़ुब में था उसके मैं गिरफ़्तार करने गया था उसे जो ले के मेरी उम्र का एक दिन भागता जा रहा था
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