खाली डिब्बा है फ़क़त खोला हुआ चीरा हुआ यूँ ही दीवारों से भिड़ता हुआ टकराता हुआ बेवजह सड़कों पे बिखरा हुआ फैलाया हुआ ठोकरें खाता हुआ खाली लुढ़कता डिब्बा यूँ भी होता है कोई खाली-सा बेकार-सा दिन ऐसा बेरंग-सा बेमानी सा बेनाम सा दिन
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