कुछ ख़्वाबों के ख़त इन में
कुछ चाँद के आईने
सूरज की शुआएँ हैं
नज़मों के लिफाफ़ों में
कुछ मेरे तजुर्बे हैं
कुछ मेरी दुआएँ हैं
निकलोगे सफ़र पर जब
यह साथ में रख लेना
शायद कहीं काम आए
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