बहुत बौना है ये सूरज
हमारी कहकशाँ की इस नवाही सी galaxy में बहुत बौना सा ये सूरज जो रौशन है
ये मेरी कुल हदों तक रौशनी पहुँचा नहीं पाता
मैं marc और Jupiter से जब गुजरता हूँ
भँवर से ब्लैक होलों के
मुझे मिलते हैं रस्ते में
सियह गिर्दाब चकराते ही रहते हैं
मसल के जुस्तजु के नंगे सहराओं में
वापस फेंक देते हैं
जमीं से इस तरह बाँधा गया हूँ मैं
गले से gravity का दायमी पट्टा नहीं खुलता
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