नये नये ही चाँद पे रहने आये थे हवा ना पानी, गर्द ना कूड़ा ना कोई आवाज़, ना हरक़त
ग्रेविटी पे तो पाँव नहीं पड़ते हैं कहीं पर अपने वतन का भी अहसास नही होता
जो भी घुटन है जैसी भी है, चल कर ज़मीं पर रहते हैं चलो चलें, चल कर ज़मीं पर रहते ह
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