Friday, 1 December 2017

क्या क्या चलता है

आदमी के पाँव दो हैं तो पाँव पाँव चलता है
पंछी भी तो कभी कभी छाँव छाँव चलता है

चलने वाले कैसे कैसे देखो किस तरहा चले
पैर हैं ना पंख हैं, फिर भी भी ये हवा चले

अपने आप चलते चलते मेज़ पर से गिर पड़ी
अम्मा ने बताया कल भी चल रही थी घड़ी

छुटकी ऊपर से चिल्लाई, भइया फोन फिर से चल पड़ा
हमने समझा छोटू नंगे पाँव धूप में निकल पड़ा

गुंडों की लड़ाई में तो हाँकियाँ भी चलती हैं
कहते है लोग बाग, कभी कभी चालाकियां भी चलती हैं

ठांय ठांय करती सनसनाती गोलियां चली
बिन सड़क की बस्तियों में कितनी बोलियां चलीं

हिलती डुलती भी नही मगर दुकान चलती है
मुँह में है बंधी हुई फिर भी जबान चलती है

गर्मी सर्दी आँधी पानी एक जैसा चलता है
रात हो या दिन कहते है सभी कि पैसा चलता है

दाएँ बाएँ हर तरफ रिवाज चलते रहते हैं
बैठे बैठे भी तो काम काज चलते रहते हैं

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