Monday, 26 January 2015

सिसकी

गीली सी आवाज़ सुनी थी आंख ने शायद
सिसकी है

छोटे छोटे से रिश्तों को बालिश्तों से नापते रहना
रात के पर्दे में रो लेना
रोशनी दिन की लाते रहना

नींद में कोई रोता रहा है सोते सोते
सुबकी है

गीली सी आवाज़ सुनी थी आंख ने शायद
सिसकी है

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