गीली सी आवाज़ सुनी थी आंख ने शायद सिसकी है
छोटे छोटे से रिश्तों को बालिश्तों से नापते रहना रात के पर्दे में रो लेना रोशनी दिन की लाते रहना
नींद में कोई रोता रहा है सोते सोते सुबकी है
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