उस दिन की तो बात है मेरा छोटा बेटा पिछली किसी बरस की दिवाली का छूटा इक अनार उठा लाया था बेमौका बेमौसम जब वो जला रहा था कितना सूना लगा था आंगन
कितने बरसों बाद तुम्हारा बेमौसम इक खत आया है
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