बुरा लगा तो होगा ऐ खुदा तुझे,
दुआ में जब,
जम्हाई ले रहा था मैं
दुआ के इस अमल से थक गया हूँ मैं
मैं जब से देख सुन रहा हूँ,
तब से याद है मुझे,
खुदा जला बुझा रहा है रात दिन,
खुदा के हाथ में है सब बुरा भला
दुआ करो
अजीब सा अमल है ये
ये एक फ़र्जी गुफ़्तगू,
और एकतरफ़ा
एक ऐसे शख्स से,
ख़याल जिसकी शक्ल है
ख़याल ही सबूत है.
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