बहुत रात हुई..
थक गया हूं,
मुझे सोने दो
चांद से कह दो उतर जाये
बहुत बात हुई
आशियां के लिये चार तिनके भी थे
आसरे रात के और दिन के भी थे
ढूंढते थे जिसे,
वो ज़रा सी ज़मीं
आसमां के तले खो गयी है कहीं
धूप से कह दो उतर जाये,
बहुत बात हुई
याद आता नहीं अब कोई नाम से
सब घरों के दिये बुझ गये शाम से
वक़्त से कह दो गुज़र जाये,
बहुत बात हुई
ज़िन्दगी के सभी रास्ते सर्द हैं
अजनबी रात के अजनबी दर्द हैं
याद से कह दो गुज़र जाये,
बहुत बात हुई
मैं थक गया हूं,
मुझे सोने दो,
बहुत रात हुई
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