Saturday, 15 March 2014

ऑंखें

मैंने रक्खी हुई हैं आँखों पर

तेरी ग़मगीन-सी उदास आँखें

जैसे गिरजे में रक्खी ख़ामोशी

जैसे रहलों पे रक्खी अंजीलें

एक आंसू गिरा दो आँखों से

कोई आयत मिले नमाज़ी को

कोई हर्फ़-ए-कलाम-ए-पाक मिले

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