Sunday, 14 December 2014

बारिश

बारिश होती है जब
तो इन गाढ़ी पत्थर की दीवारों पर
भीगे भीगे नक़्शे बनने लगते हैं
हिचकी हिचकी बारिश तब
पहचानी सी इक लिखाई लगती है

बारिश कुछ कह जाती है
ऐसे ही अश्कों से भीगे ख़त शायद
तुमने पहले देखा हो

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