बारिश होती है जब तो इन गाढ़ी पत्थर की दीवारों पर भीगे भीगे नक़्शे बनने लगते हैं हिचकी हिचकी बारिश तब पहचानी सी इक लिखाई लगती है
बारिश कुछ कह जाती है ऐसे ही अश्कों से भीगे ख़त शायद तुमने पहले देखा हो
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