Wednesday, 24 September 2014

तेरे जाने से

तेरे जाने से तो कुछ बदला नही
रात भी आयी थी
और चाँद भी था
तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं

साँस भी वैसे ही चलती है हमेशा की तरहा
आंख वैसे ही झपकती है हमेशा की तरहा
थोड़ी सी भीगी हुई रहती है
और कुछ बदला नही

होंठ खुश्क होते हैं
प्यास भी लगती है
आज कल शाम से ही
सर्द हवा चलती है
बात करने से धुआं उठता है
जो दिल का नहीं

तेरे जाने से तो कुछ बदला नही
रात भी आयी थी
और चाँद भी था
हाँ मगर नींद नहीं
नींद नहीं..........

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