Thursday, 25 September 2014

सनसेट के रंग

हर रोज़ जब सूरज गोरुब होता
वो उसी पुल पर खड़ी
उसका इंतजार करती

लेकिन

वो नही आया

एक बार फिर जिंदगी का हाथ उसकी उँगलियों से छूटने लगा

सनसेट के रंग कितने कच्चे होते हैं

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