बारिश आती है
तो मेरे शहर को कुछ हो जाता है
टीन की छत,
तिरपाल का छज्जा,
पीपल-पत्ते,
परनाला सब बजने लगते हैं
तंग गली में जाते-जाते
साइकिल का पहिया
पानी की कुल्लियाँ करता है
खुश्क था
तो रस्ते में टिक-टिक छतरी टेक के चलते थे
बारिश में आकाश में छतरी टेक के टप-टप चलते हैं.
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