समंदर देख रहा था मैं समन्दर के अन्दर से मेरी अमृत की कुम्भी आने वाली थी समन्दर करवटें लेता था रह रह कर तो बल पड़ते थे पानी में मेरी बच्ची के नाज़ुक कोख से टीसें गुज़रती हैं मुझे उस वक्त डर लगता था अमृत मांगने से
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