वो अभी तक पुल पे खड़ी थी
अतीत से आती आवाज़ और हंसी
बहुत दूर नही लगी
ऐसे ही लगा
जैसे
आवाज़ अभी तक बीती नहीं
शायद कोहरे में हाथ बढ़ाये
तो छू ही ले उसे
घडी देखी
सेकंड की सुई अपने पहरे पर परेड कर रही थी
और
अभी तक
उसके आने की कोई आहट नही थी
रात में क्रैक आ गया था
आधी रात कट चुकी थी
No comments:
Post a Comment