Monday, 25 August 2014

ये कैसी उम्र में आकर मिली हो तुम

ये कैसी उम्र में आकर मिली हो तुम
बहुत जी चाहता है
फिर से बो दूँ अपनी आँखें
तुम्हारे ढेर सारे चेहरे उगाऊं
और बुलाऊं बारिशों को
बहुत जी चाहता है
कि फुर्सत हो,तसव्वुर हो
तसव्वुर में ज़रा सी बागबानी हो!

मगर जानां
एक ऐसी उम्र में आकर मिली हो तुम
किसी के हिस्से की मिटटी नहीं हिलती
किसी की धूप का हिस्सा नहीं छनता
मगर क्या क्यारी के पौधे
पास अपने अब किसी को
पाँव रखने के लिए भी थाह नहीं देते
ये कैसी उम्र में आकर मिली हो तुम?

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