Saturday, 23 August 2014

आंख मिचोली

छोटा सा शीशे का टुकड़ा
घास के अन्दर छुप के बैठा
मेरी आँख पे सूरज मार के ख़ुश होता है,
हँसता है
सूरज ख़ुश है,

छोटा सा शीशे का टुकड़ा
घास में रख के खेल रहा है
मेरी आँख पे छींटे मार के छेड़ रहा है
आँख पे एक हथेली रख के
मैं फ़ौरन दोनों की आँखों से ओझल हो जाता हूँ

उँगलियों की झिर्रियों से वो दोनों झाँक के
मुझको ढूँढने लगते हैं
और मैं आँखें बंद किये
तेरी गोद में सर रख के छुप जाता हूँ!

क़ायनात से आँख मिचोली खेल रहा हूँ!!

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