Wednesday, 23 July 2014

रेप मार्किट 3


मैडम-मैडम...मेम साहब!
इफ़ती ने उचक उचक के उस जर्मन लड़की को अपनी तरफ़ रागिब कर लिया.
वो होटल से निकली ही थी,
इफ़ती फ़ौरन अपनी टैक्सी घुमा के पहुंच गया.

इफ़टी!
मुस्करा के वो लड़की टैक्सी में घुस गई,
और गर्दन उसके कान के पास लाकर बोली,
आई वांट टु वेयर बेंगल्ज़.

व्हाट? व्हाट?
इफ़ती को थोड़े ही से अंगेरज़ी के लफ़्ज़ आते थे. वो भी उसने इसी होटल से टूरिस्ट पकड़ पकड़ के सीख लिए थे.
उस जर्मन लड़की ने अपनी बांहें दिखा कर समझाया,

चूडियां! वो चूडियां पहनना चाहती थी.
इफ़ती ख़ुश हो गया.
कोलाबा से भिंडी बाज़ार!
अच्छा भाड़ा बनेगा और तक़रीबन आधे दिन की सवारी तो पक्की हुई.

यस-यस...यस-यस.
उसके बाद पता नहीं वो गोरी कलाइयां घुमा के क्या क्या कहती रही.
साइज़ की बात कर रही थी या रंग की
लेकिन वो यस यस! ही कहता रहा.

फ़ार!...वैरीफ़ार... !
उसने बांह झुला कर उंगलियों से तर्जुमा कर दिया. लड़की की मुस्कराहट और गर्दन ने रज़ामंदी दे दी. कई जगह पर वो इशारों से कुछ कुछ पूछ लेती थी,
और अगर यस नो से काम नहीं चलता तो वो किसी भी बिल्डिंग की तरफ़ इशारा करके नाम ले देता.
हाईकोर्ट...हाईकोर्ट...ब्लैक हॉर्स... काला घोड़ा...काला घोड़ा वैरी फ़ेमस!
मशहूर है! बहुत!
कहते हुए हाथ सर से ऊपर तक उठा देता.

एक बात बड़ी ख़राब थी उस लड़की में,
एक तो सिगरेट बहुत पीती थी,
दूसरे हंसती बहुत थी
और बात-बात पर ताली बजाने लगती थी.
गुड गुड!
बस इतना ही समझ आता था उसे.

कभी कभी आगे आकर उसके कंधों पर हाथ रख के जब कुछ पूछती तो होंठ उसके कानों को छू जाते थे.
हटाना मुश्किल हो जाता.

अरे लोग देख रहे हैं यार.
पीछे हट कर बात कर ना.

व्हाट?
वो पूछती.

सिटडाउन...माई व्हील...बैलेंस नहीं रहता यार.
वो स्टैरिंग व्हील दाएं बाएं झुलाकर बताता.

यस...यस...!
वो कहती.

चूडियां पहन कर वो लड़की बहुत खुश हुई.
बार बार उसकी आंखों के सामने बजाती और खिलखिला के हंस पड़ती.

मुश्किल हो गई जब टैक्सी तक जाते जाते उसने इफ़ती की बांह में हाथ डाल लिया था.
सब देख रहे थे.
फुटपाथ पर भीड़ थी,
दूकानें थीं,
और टैक्सी काफ़ी दूर खड़ा करके आना पड़ा था.

उस पर एक और आफ़त आन पड़ी.
एक बुर्कापोश औरत नक़ाब उलटे,
कुछ ख़रीद रही थी,
उसके हाथ पकड़ लिए उसने.

इफ़टी...व्हाट इज़ दिस?...आई वांट दिस.

घबरा के औरत ने हाथ अंदर कर लिए.
और वो उसके हाथ पकड़ के बाहर निकालने की जिद करने लगी.
शो मी...शो मी...प्लीज़.

मैडम...दैट इज़ मेहंदी...मेहंदी...
अब यहां से चलो, मैं लगवा दूंगा.
कम...कम नाव!
अब इफ़ती की बारी थी.
उसे हाथ से,कमर से,बांह से खींच के लाना पड़ा.

सारा रास्ता वो रूठी रही.
उसके बाद इफ़ती का भी मन ही नहीं किया कि टैक्सी निकाले.
होटल के सामने ही गाड़ी लगा के सो गया...
वो भी शाम को बाहर नहीं निकली.
इफ़ती भी कहीं नहीं गया.

अगली सुबह चार या पांच बजे का वक़्त होगा. आसमान अभी खुला नहीं था.
इफ़ती की आंख खुल गई.
वो जर्मन लड़की होटल से निकल रही थी.
वो भी शायद रात भर जागी थी,
या नाचती रही थी.

हमेशा की तरह रात देर तक होटल में बैंड बजता रहा था.
ज़्यादातर फिरंगी रात को पी के नाचते रहते हैं. फिर देर तक सोते हैं.
लेकिन हैलेन पता नहीं क्यों जल्दी उठ गई थी.

उसने ख़ुद ही एक नाम दे दिया था उस जर्मन लड़की को.
गेट पर खड़े हो के हैलेन ने इधर उधर देखा तो इफ़ती ने हाथ हिला दिया.

वो चिल्लाई,
हाये ए...

जब तक इफ़ती टैक्सी स्टार्ट करता
वो आकर सामने की सीट पर उसके साथ ही बैठ गई.

लेट अस गो.

किधर?...व्हैर...?
मेहंदी के लिए बहुत जल्दी है.
उसने घड़ी दिखाई और हथेली का इशारा किया.

ओह नो...सिली!
चलो...मार्निग वाक इन टैक्सी.
फिर वही हंसी और ताली बजा कर बोली.
गेट वे इंडिया... चलो.
बहुत दूर नहीं था.
वो कोलाबा में ही थे.

इफ़ती चल तो दिया लेकिन वो ऐसी सट के बैठी थी उसके साथ
और स्कर्ट भी इतनी पतली कि बार बार नज़र हटानी पड़ती थी.

गेटवे पर इतनी सुबह कोई था नहीं,
लेकिन दो तीन मोटरबोट वाले जाग रहे थे. ऐलीफेंटा की सवारी अक्सर पौ फटे मिल जाती थी.
और अब रात भी हल्की होने लगी थी.

उनलोगों ने इफ़ती को पहुंचते देखा था.
एक ने दूर से आवाज़ भी दी थी
ऐलीफेंटा मैडम?

नहीं नहीं यूंही घूमने आए हैं.
अगला भाग इफ़ती ने जवाब दिया था.

हैलेन उतर के टहलती हुई समंदर के किनारे तक चली गई थी...
और दीवार पे बैठ के सिगरेट जला दिया.
इफ़ती ने झाड़न निकाला और गाड़ी साफ़ करने लगा.

ज़रा देर में मोटरबोट वालों में से एक लड़का टहलता हुआ लड़की के पास से गुज़रा और सिगरेट मांगी.
सिगरेट...मैडम
गिव मी वन सिगरेट.

आफ़कोर्स!
मुस्करा के उसने एक सिगरेट निकाला.

इफ़ती को हैलेन गैर महफूज़ लगी तो वो अपनी गाड़ी से बाहर निकला.
पर उसे दूसरे ने धकेल के वापस बिठा दिया.

बैठ नां श्याने!
तेरा क्या ले रहा है?
एक सिगरेट ही तो मांगा है.
येसब फिरंगी साले गंजेड़ी होते हैं.

लेकिन वो गांजा वांजा कुछ नहीं लेती.

तुझे क्या मालूम?
वो ऐसे खड़ा हो गया था उसके सामने
कि इफ़ती उधर न देख सके.

सफ़ेदा पीते हैं सब.
हशिश कहते हैं ये लोग...
और गोविंदा तो चाल देखकर सूंघ लेता है.

गोविंदा कौन?

वही,जो सिगरेट ले रहा है.
चुटकी में भर देगा.
पीती होगी तो मान जाएगी.
नहीं पीती तो ना सही.
घूमने निकली है ना,
मोटरबोट पे घुमा के ले आएगा.

वो जाएगी तब ना...
कोई ज़बरदस्ती है?

उसने बड़ी सख़्ती से इफ़ती का चेहरा
अपनी उंगलियों में दबाया

ज़बरदस्ती तो तू कर रहा है साले.
शादी बनाने चला है क्या?

इफ़ती ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की.
आंखों से पानी निकल आया.
लेकिन वो ज़्यादा तगड़ा था.

उसी वक़्त गोविंदा की आवाज़ आई
अबे पट गई बे हरी.
चलेगा मोटरबोट में?

हरी ने धक्का दिया उसे
और भाग गया.
इफ़ती खड़ा हुआ तो देखा वो मोटरबोट में जाने के लिए सीढियां उतर रही थी.

वहीं से आवाज़ दी
इफ़टी... वेट फार मी...कमिंग.

गोविंदा ने हाथ पकड़ के उसे मोटरबोट में ले लिया. हरी कूद के दाखिल हो गया,
और फटफटाती हुई मोटरबोट बीच समंदर की तरफ चल दी.

इफ़ती अपनी आंखें पोंछता हुआ देर तक उसकी तरफ देखता रहा.
अंधेरे में मोटरबोट की आवाज़ दूर जा रही थी.

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