ये राह बहुत आसान नहीं जिस राह पे हाथ छुड़ाकर तुम यूँ तनहा चल निकली हो इस खौफ़ से शायद राह भटक जाओ न कहीं हर मोड़ पे मैंने नज़्म खड़ी कर रखी है
थक जाओ अगर और तुमको ज़रूरत पड़ जाये इक नज़्म की उँगली थाम के वापस आ जाना
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