इन बूढ़े पहाड़ों पर कुछ भी तो नहीं बदला
सदियों से गिरी बर्फें
और उन पे बरसती हैं
हर साल नई बर्फें
इन बूढ़े पहाड़ों पर कुछ भी तो नहीं बदला
घर लगते हैं कब्रों से
खामोश सफेदी में
कुत्बे-से दरख्तों के ...
तारीख का कहना है
रहना चट्टानों को
दरियाओं को बहना है
अब की तुग्य़ानी में
कुछ डूब गए गाँव
कुछ बह गए पानी में ...
नानी की अगर माने
तो भेडिय़ा जिन्दा है
जाएँगी अभी जानें ...
इन बूढ़े पहाड़ों पर कुछ भी तो नहीं बदला
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