मुझे बस यूँ नही मरना है कि
सब मरते हुए देखे
कि मेरा मुह खुला हो
धौकनी चलती हो साँसों में
नाल इक नाक में अटकी हुई
दो बाह की नस में
मशीनों की तरफ सब देखते हो
धड़कने की लय विलंबित है
ये कितनी मात्रा पे चल रही है
मुझे बस यूँ नही मरना
कि एक्सीडेंट से कुछ यूँ गिरा
जैसे किसी के हाथ से चिल्लर बिखर जाये
अठन्नी पैसे दस पैसे चवन्नी
बड़े गुस्से में पूरा नोट फाड़ के
जैसे उडा देता है पुर्जो में
मुझे बस यूँ नही मरना
मुझे कुछ ऐसे उड़ जाना है
जैसे हिचकी लेकर ओस उड़ती है
कि जैसे शेर कहते कहते
सकता पड़ गया बस
या लिखते लिखते अफसाना
सियाही ख़त्म हो जाये
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